गठिया (Arthritis) रोग और गठिया रोग के प्रकार

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अर्थराइटिस क्‍या है और यह कितने तरह से आपको पहुंचाता है नुकसान, जानें

हम सभी स्वस्थ और एक सुंदर जीवन व्यतीत करना चाहते हैं। आज के समय में हमारा खान-पान भी बिल्कुल बदल चुका है और हम जो चीज खाने में इस्तेमाल करते हैं, वह लगभग सभी केमिकल युक्त होती है। इसीलिए आज के समय में बीमारियां बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। ऐसी ही एक बीमारी है अर्थराइटिस ( Arthritis) जिसे भारत में अधिकांश लोग गठिया के रोग के नाम से जानते हैं।विश्वभर में विश्व गठिया दिवस (World Arthritis Day) 12 अक्टूबर 2013 को मनाया गया और  आज  इस अवसर पर  हम आपको  इस पोस्ट मेंArthritis के बारे में बताएंगे यह क्या होता है, Arthritis किस तरह से होता है, हम किस तरह Arthritis से छुटकारा पा सकते हैं और  इसके कौन-कौन से लक्षण होते हैं।

अर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक बहुत ही आम बीमारी है। इस बीमारी में जोड़ों में दर्द होता है और जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने और हरकत करने में परेशानी होती है। गठिया रोग एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जो एक स्वस्थ इंसान को विकलांग बना देती है। एक बार यदि किसी स्वस्थ इंसान को भी गठिया रोग जैसे खतरनाक रोग  पकड़ ले तो इंसान जीते जी विकलंगो की जिंदगी जीने के लिए मजबूर हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 100 से भी अधिक किस्म के अर्थराइटिस होते हैं।

गठिया रोग इंसान के शरीर में  यूरिक एसिड के जमा हो जाने से होता है। सबसे पहले मैं आपको बताना चाहता हूं कि यूरिक एसिड होता क्या है। यूरिक एसिड हमारे कई तरह के खाना खाने से हमारे शरीर के अंदर उत्पन्न होता है। अधिकांश यूरिक एसिड बढ़ने का कारण हमारे शरीर के अंदर हमारे द्वारा किए गए भोजन पर ही निर्भर करता है। यूरिक एसिड की अधिक मात्रा में हमारे शरीर में जमा हो जाने से इंसान के शरीर के अंदर रीढ़ की हड्डियों में दर्द शरीर की हड्डियों में सूजन हड्डी मुड़ जाना इत्यादि संभव हो जाता है। गठिया रोग को अगर सुरुवतीदौर में सही कर लिया जाए तो इसे आसानी से सही किया जा सकता है

अर्थराइटिस का कारण – Cause Of Arthritis

जैसा की मैंने आप सभी को पहले भी बताया है कि गठिया रोग का मुख्य कारण हमारे शरीर के अंदर यूरिक एसिड का जमा होना है। मैं अब आपको बताता हूं कि हमारे शरीर के अंदर यूरिक एसिड जमा कैसे होता है। यूरिक एसिड का जमा होना हमारे खाद्य पदार्थ अर्थात हमारे भोजन पर निर्भर करता है। यूरिक एसिड ऐसा कोई बाहरी पदार्थ अथवा कोई बाहरी बीमारी अथवा कोई भी बाहरी तत्व नहीं है। जो हमारे शरीर के अंदर प्रवेश करके हमारे शरीर के अंदर गठिया अर्थात अर्थराइटिस जैसे रोग को उत्पन्न करता है।

यूरिक एसिड हमारे द्वारा किए गए भोजन से ही हमारे अंदर निर्माण होता है। हम किसी भी तरह के भोजन को करते हैं तो उससे हमारे शरीर के अंदर एक कम मात्रा में एसिड का निर्माण होता है। वहीं पर कुछ ऐसे भोजन भी हैं जिनके ज्यादा सेवन करने से हमारे शरीर के अंदर यूरिक एसिड ज्यादा मात्रा में बनने लगते हैं। खट्टे पदार्थ के सेवन करने से हमारे शरीर के अंदर ज्यादा मात्रा में यूरिक एसिड का निर्माण होने लगता है। यूरिक एसिड कितना खतरनाक हो जाता है यह आप पंक्तियों में आसानी से समझ सकते हैं। समान मात्रा में हमारे शरीर के अंदर जब यूरिक एसिड मौजूद होता है तो यह हमारे शरीर के अंदर किसी भी तरह के हानि नहीं पहुंचाते हैं। (Arthritis गठिया रोग के लक्षण और इसके बचाव)

Arthritis गठिया रोग के लक्षण और इसके बचाव

लेकिन जब यूरिक एसिड की मात्रा समान मात्रा से हट के आगे चली जाती है अर्थात समान मात्रा से हटके ऊपर आ जाती है तब यह हमारे शरीर के अंदर गठिया रोग अर्थात अर्थराइटिस जैसे रोगों को उत्पन्न कर देती है। यूरिक एसिड के जयादा मात्रा में बनने से गठिया रोग हमारे शरीर के अंदर अपना प्रभाव डाल सकती है। जैसा कि आप सभी जानते हैं हमारे शरीर के अंदर बहुत सारी हड्डियों का ढांचा है बहुत सारे हड्डियों का जोड़ है और गठिया रोग इन जोड़ों पर अपना प्रभाव आसानी से डालती है। मरीज के सरीर के अंदर इन जोड़ों की वजह से ही अपने हाथ अपने पांव अपने कमर अथवा गले को आसानी से हिला और घुमा सकते हैं। लेकिन जब गठिया रोग का प्रभाव हमारे इन जोड़ों पर पड़ता है तो इन जोड़ों में सूजन दर्द और अकड़न आने लगता है। जिसमें इंसान का उठना-बैठना घूमना इत्यादि सभी बड़ी मुश्किल से हो पाता है।

आर्थराइटिस के बड़े कारण

आमतौर पर आर्थराइटिस के लिए मोटापे को दोषी ठहराया जाता है। लेकिन इसके और भी कई कारण हैं। औरतों में एस्ट्रोजन की कमी और थाइराइड का विकार भी इसका एक बड़ा कारण है। स्किन या ब्लड डिजीज जैसे लुकेमिया के कारण भी यह बीमारी होती है। टाइफायड या पैराटाइफायड के बाद भी जोड़ों में दर्द की‌ शिकायत रहती है जो लगातार बनी रहे तो आर्थराइटिस बन जाती है। डाक्टर कहते हैं कि आंतों को संक्रमित करने वाली कीटानु  रिजॉक्स भी जोड़ों में तकलीफ पैदा करते हैं जिससे आर्थराइटिस होता है। अगर आपके बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता कम है तो वो भी आर्थराइटिस का शिकार हो सकता है।

आर्थराइटिस के प्रकार

आर्थराइटिस के कई प्रकार होते हैं, इनमें से सबसे आम है आस्टियोआर्थराइटिस और रयूमेटायड आर्थराइटिस

1 . आस्टियोआर्थराइटिस सबसे आम प्रकार का आर्थराइटिस है।यह आनुवांशिक भी हो  सकता है। यह उम्र बीतने के साथ प्रकट होता है। यह विशेष रूप से शरीर का भार सहन करने वाले अंगों पीठ, कमर, घुटना,  पांव,  उंगलियां, कूल्हों और घुटनों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। कभी-कभी आस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों में चोट लगने कि वजह से भी हो जाता है जैसे किसी खिलाडी को फुटबाल खेलते वक्त घुटने में चोट लग जाए या कोई कार दुर्घटना में गिर जाए। तो साल दर साल उसके घुटने में सुधार आता रहता है और उसके घुटनों में आर्थराइटिस हो सकता है।

2 . रयूमेटाइड आर्थराइटिस : यह इस बीमारी का बहुत अधिक पाया जाने वाला गंभीर रूप है। इस अर्थराइटिस का समय पर प्रभावी उपचार करवाना आवश्‍यक होता है वरना बीमारी बढ़ने पर एक साल के अन्दर ही शरीर के जोड़ों को काफी नुकसान हो जाता है।रयूमेटाइड आर्थराइटिस, तब होता है जब हमारे शरीर का प्रतिरक्षा तन्त्र ढंग से काम नहीं करता है यह जोड़ और हड्डियों को प्रभावित करता है तथा आंतरिक अंग तथा तन्त्रों को भी प्रभावित कर सकता है। आपको थकान तथा बुखार हो सकता है।यह  दूसरे आम प्रकार का आर्थराइटिस है  जो कि जोडो़ में फैट के जमा होने से होती है। यह पैर की सबसे बड़ी उंगली को प्रभावित करती है लेकिन कई दूसरे जोड़ भी प्रभावित होते  है।

3 . आर्थराइटिस कई और बीमारियों में भी देखने को मिल सकता है। जैसे ल्यूपस जिसमें कि शरीर के प्रतिरक्षा तन्त्र जोड़, हृदय, त्वचा, गुर्दे तथा अन्य अंगों को नुकसान पहुंचता है। एक संक्रमण जो कि जोड़ों में घुस कर हड्डियों के बीच के भाग को नष्ट कर देता है।

4 . सोराइटिक अर्थराइटिस : अर्थराइटिस के दर्द का यह रूप सोराइसिस के साथ प्रकट होता है। समय पर और सही इलाज न होने पर यह बीमारी काफी घातक और लाइलाज हो जाती है।

5 .पोलिमायलगिया रूमेटिका : यह 50 साल की आयु पार कर चुके लोगों को होता है। इसमें गर्दन, कंधा और कमर में असहनीय पीड़ा होती है और इन अंगों को घुमाने में कठिनाई होती है। अगर सही समय पर सही इलाज हो तो इस बीमारी का निदान किया जा सकता है। लेकिन कई कारणों से आमतौर पर इसका इलाज संभव नहीं हो पाता है।

6 . एनकायलाजिंग स्पोंडिलाइटिस : यह बीमारी सामान्यत: शरीर के पीठ और शरीर के निचले हिस्से के जोड़ों में होती है। इसमें दर्द हल्‍का होता है लेकिन लगातार बना रहता है। इसका उपचार संभव हैं लेकिन सही समय पर इसकी पहचान कर सही इलाज किया जाए जा सकता है।

7 .  रिएक्टिव अर्थराइटिस : शरीर में किसी तरह के संक्रमण फैलने के बाद रिएक्टिव अर्थराइटिस होने का खतरा रहता है। आंत या जेनिटोरिनैरी संक्रमण होने के बाद इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। इसमें सही इलाज काफी कारगर साबित होता है।

8 . गाउट या गांठ : गांठ वाला अर्थराइटिस जोड़ों में मोनोसोडियम युरेट क्रिस्टल के समाप्‍त होने पर होता है। भोजन में बदलाव और कुछ सहायक दवाओं के कुछ दिन तक सेवन करने से यह बीमारी ठीक हो जाती है।

9 . सिडडोगाउट : यह रूमेटायड और गाउट वाले अर्थराइटिस से मिलता जुलता है। सिडडोगाउट में जोडों में दर्द कैल्शियम पाइरोफासफेट या हाइड्रोपेटाइट क्रिस्टल के जोड़ों में जमा होने से होता है।

Arthritis के लक्षण – कैसे पहचानें

क्या आपको सुबह उठने पर जोड़ों में दर्द, हलकी सुजन और अकड़न की शिकायत रहती है। वक्त बेवक्त घुटने या अन्य जोड़ दुखते है। गर्दन और कमर के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है। दवाई खाने से दर्द कम होता है, लेकिन फिर उभर आता है। पैरों के टखने दर्द करते हैं और कभी कभी चला भी नहीं जाता। घुटने, टखने, गर्दन, कमर, कलाई, पंजे दुखना आर्थराइटिस है या इसकी शुरूआत।

  • जोड़ों में सूजन आ जाना।
  •     जोड़ों में दर्द रहना।
  •     घुमाने या मूव करने में परेशानी होना।
  •     जोड़ों को घुमाने–फिराने में देर लगना।
  •     जोड़ों में भारीपन आ जाना।

अगर आपके शरीर Rheumatoid Arthritis है तो इसके कई प्रकार के लक्षण है. जिनसे आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपको Rheumatoid Arthritis हो गया है.अगर आपको Rheumatoid Arthritis हो गया तो आपके हाथ पैर के छोटे-छोटे जोड़ों में बहुत ज्यादा दर्द होने लगता है. आप के जॉइंट छूट जाते हैं. उनसे जॉइंट में बहुत ज्यादा सूजन देखने को मिलती है. और आपके जॉइंट्स लाल हो जाते हैं. आपकी एडी में दर्द होने लगता है. और आपके घुटनों और कमर में तो इतना ज्यादा दर्द होने लगता है. कि इसके कारण मरीज चल भी नहीं पाता है. और इन सभी से आप आसानी से पता लगा सकते हैं. कि आपको Rheumatoid Arthritis हो गया है. इसके अलावा इसके और भी कई कारण है. जैसे वजन का कम होना, और इससे भूख भी कम हो जाती है. और यदि आपको इस तरह की किसी प्रकार की दिक्कत नजर आती है. तो आप इसका तुरंत इलाज करवाएं और डॉक्टर के पास जाकर पहले ब्लड टेस्ट या एक्सरे करवा कर जांच करवाएं.और यदि आप समय पर इसके साथ करवा लेते हैं और दवाई लेते हैं तो बहुत सी ऐसी दवाइयां है जिससे कि आप इससे बहुत ही आसानी से छुटकारा पा सकते हैं.

Arthritis (गठिया) रोग के  बचाव

जैसा  कि आप सभी जानते हैं कि गठिया  रोग हड्डियों से संबंधित है। यह अपना प्रभाव हमेशा हमारे हड्डियों के ऊपर ही जमाता है। तो आप कोशिश करें कि आपके शरीर के अंदर हड्डियां कमजोर ना हो पाएं। अब कभी भी बाजार के खाने डिब्बाबंद खाने बासी खाने दूषित खाने फास्ट फूड जंक फूड चौमिन बर्गर डोसा इत्यादि कभी भी बाजार से ना सेवन करें। के सभी प्रकार के आपके शरीर के अंदर गठिया जैसे खतरनाक रोग को प्रारंभ करने में उसकी मदद करता है।

आजकल की भागदौड़ के जीवन में इंसान थका-हारा जब अपने घर आता है तो खाना खाने के बाद तुरंत अपने बेड पर चला जाता है। यह एक बहुत ही गलत तरीका है हमारे शरीर को बीमार करने के लिए। आप भूलकर भी यह काम अपने जीवन में कभी ना करें। भोजन करने के तुरंत बाद हमें आराम करने की आदत को अपने जीवन से हटाना अति आवश्यक है। यदि आप इन लक्षणों से ग्रसित हैं तो आप के अंदर ना केवल गठिया बल्कि बहुत सारे ऐसे विकार है जो आसानी से आपको ग्रसित हो जाएंगे। (Arthritis गठिया रोग के लक्षण और इसके बचाव)

आप हमेशा कोशिश करें जब भी आप भोजन करें तो कुछ देर टहलने की आदत अपने जीवन में डालें। भोजन करने के बाद टहलने से हमारे शरीर बहुत स्वस्थ रहते हैं। शरीर के अंदर पाचन तंत्र को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हमारे जीवन में ज्यादातर बीमारियां हमारे पाचन तंत्र के कारण ही होता है। अतः मनुष्य के जीवन में उसके पाचन तंत्र की भूमिका बहुत ज्यादा अहम मानी जाती है। इस कारण से सभी मनुष्य को अपने पाचन तंत्र की देखभाल सही तरीके से करनी चाहिए।

 

जोड़ों का दर्द (Arthritis)मिटाने का प्राचीन इलाज  –

सिकाई

गर्म या ठंडी सिकाई अर्थराइटिस के दर्द में कुछ समय के लिए राहत पाने का सबसे आसान तरीका होता है। सिकाई के लिए हीटिंग पेड , गर्म पानी की सिकाई , गर्म नमक की सिकाई आदि का उपयोग किया जा सकता है।

ठंडी सिकाई  के लिए बर्फ का उपयोग किया जाता है। जिस तरह की सिकाई से आपको फायदा पहुँचता हो उस तरह की सिकाई लेनी चाहिए।

अजवाइन और नमक की भाप की सिकाई बहुत लाभ देती है। इसके लिए एक पतीली में दो गिलास पानी ,चार चम्मच अजवाइन और दो चम्मच नमक डालकर गर्म करें। पतीली पर जाली रखें। इस जाली पर एक रुमाल या पतला नेपकिन गीला करके निचो कर तह करके रखें।

जब यह रुमाल भाप से गर्म हो जाये तब इससे दर्द वाली जगह सिकाई करें। रुमाल जितना सहन हो सके उतना ही गर्म करें। ज्यादा गर्म हो तो थोड़ा ठंडा कर लें। इस प्रकार रोजाना 15 -20 मिनट तक सिकाई करने से जोड़ों के दर्द में बहुत आराम मिलता है।

गर्म या ठंडी सिकाई 20 मिनट से अधिक नहीं करनी चाहिए। रुक रुक कर सिकाई करनी चाहिए। स्किन पर सीधे गर्म या ठंडा लगाने के बजाय पहले त्वचा पर कपड़ा या तौलिया आदि लगा कर सिकाई करनी चाहिए।

एक्सरसाइज

एक्सरसाइज करना लाभ दे सकता है। इससे उन मांसपेशियों को ताकत मिल सकती है जो जोड़ों को हिलाने डुलाने में काम आती है और जोड़ को सहारा देती है। इससे नींद भी अच्छी आती है और मन खुश खुश रहता है। शरीर का वजन कम रहता है। ये सभी दर्द को कम करते है।

अपने सामर्थ्य के अनुसार हल्की एक्सरसाइज ही करनी चाहिए। दर्द बढ़ ना जाये ये ध्यान जरूर रखना चाहिए ।

पौष्टिक भोजन

सन्तुलित और पोष्टिक भोजन जो खनिज , विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट आदि से भरपूर हो ऐसा लेना चाहिए। इससे वजन भी सही रहता है और सूजन या संक्रमण आदि में आराम मिलता है।

सब्जी का जूस ,सूप या फल आदि लिए जा सकते है। सेब , पपीता ,अंगूर ,आंवला , चीकू , संतरा , आदि जो भी फल पसंद हो ले सकते है।

रसोई के मसाले जैसे हींग , हल्दी , मेथी आदि इसमें फायदा पहुंचाते है। इनका उपयोग यथोचित मात्रा में करना चाहिए। मेथी का उपयोग विशेष कर जोड़ों के दर्द में बहुत लाभ पहुंचाता है।

सब्जियों में अदरक , लहसुन , करेला , बथुआ , ककड़ी आदि से लाभ मिलता है। रक्त की जाँच में यूरिक एसिड अधिक आये तो सेब नियमित रूप से खाना चाहिए।

देर से पचने वाले या गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थ कम ही लेने चाहिए। तला हुआ तथा अधिक मिर्च मसाले वाला भोजन नहीं लेना चाहिए। चाय , कॉफी , चीनी , दही आदि कम लेने चाहिए। कोल्ड ड्रिंक , शराब , धूम्रपान आदि नहीं लेने चाहिए।

सूखे मेवे जो खून की कमी दूर करते है लेने चाहिए। मुनक्का , किशमिश , अंजीर , काजू , अखरोट आदि के उपयोग से फायदा मिलता है।

नींद

नींद पूरी नहीं होने से अर्थराइटिस का दर्द और थकान आदि में बढ़ोतरी हो सकती है। अतः अच्छी नींद के उपाय जरूर करने चहिये। जैसे सोने का कमरा शांत हो , तापमान सही हो। बिस्तर साफ सुथरा हो।

रात को चाय कॉफी न लें। रात का खाना हल्का फुल्का आसानी से पचने वाला होना चाहिए। । रात को अधिक देर तक जागना , दिन में सोना ठीक नहीं है।

मानसिक तनाव , अवसाद , चिंता , डर , दुःख आदि से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए प्राणायाम , मेडिटेशन (Meditation) आदि सीख कर इनका दैनिक अभ्यास बहुत फायदेमंद हो सकता है।

 

जोड़ों का दर्द मिटाने के प्राचीन घरेलु नुस्खे – (Gharelu Nushkhe For Joint Pain)

—  तिल का तेल और कपूर से बने तेल की मालिश करने से दर्द दूर होता है। यह तेल बनाने के लिए एक सफ़ेद कांच की शीशी में आधा लीटर तिल का तेल और  10  ग्राम कपूर मिलाकर धूप में रख दें। जब ये दोनों घुल मिलकर एक हो जाये तब इस तेल की मालिश करने से जोड़ों के दर्द में बहुत आराम मिलता है।

—  हारसिंगार ( पारिजात ) के पेड़ की  5 -7  पत्तियां लाकर पीस लें। इन्हें एक गिलास पानी में डालकर 10  मिनट उबालें। ठंडा होने पर छान कर पियें। यह पानी सुबह खाली पेट कुछ समय  लगातार पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है।

हारसिंगार के पेड़ की पहचान यह है की इसमें  सदाबहार के फूल जैसे छोटे सफ़ेद खुशबूदार फूल लगते है। जो रात को महकते है और सुबह खिर जाते है। पेड़ के नीचे फूलों की चादर सी बिछ जाती है।

—  असगंध की जड़ ( पंसारी से लें ) को बारीक पीस लें। इसमें बराबर मात्रा में पिसी हुई शक्कर मिला लें। यह मिश्रण एक चम्मच फांक कर गर्म मीठा दूध पियें। सुबह शाम कुछ दिन इस प्रयोग से जोड़ों का दर्द व गठिया मिटता है।

—  एक चम्मच मेथीदाना धोकर रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह थोड़ा हिलाकर पानी को निथार लें। यह पानी पी लें। बची हुई मेथी को एक सूती कपड़े में बांधकर अंकुरित करके खा लें।

कुछ दिन लगातार इस प्रयोग से जोड़ों के दर्द में बहुत आराम मिलता है। इसे सर्दी के मौसम में कोई भी कर सकता है। इससे जोड़ों के दर्द से बचाव भी होता है।

—  सोंठ , जीरा , अजवाइन , काली मिर्च , काला नमक और सेंधा नमक बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें। आधा चम्मच यह पाउडर एक गिलास छाछ में मिलाकर पियें। ऐसी छाछ दिन में तीन बार पियें। इससे बढ़ा हुआ यूरिक एसिड कम होता है और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। छाछ खट्टी नहीं होनी चाहिए।

—  आधा गिलास ककड़ी का रस और आधा गिलास गाजर का रस मिलाकर पीने से रक्त में यूरिक एसिड कम होकर जोड़ों का दर्द मिटता है।

— एक गिलास पानी में दो चम्मच सूखे आंवले का पाउडर और इतना ही गुड़ डालकर उबालें। जब चौथाई रह जाये तब छान कर पियें। सुबह शाम यह पानी पियें। परहेज करें रोटी बिना नमक वाली लें। रोटी के साथ मूंग की दाल काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर लें। कुछ दिन लगातार लेने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

—  दो चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर मिला लें। इसे गुनगुने पानी से सुबह खाली पेट कुछ दिन लेने से जोड़ों के दर्द में आराम आता है।

—  अमरुद के पत्ते पीस कर दर्द वाले स्थान पर लगाएं। अमरुद के पत्ते पानी में उबाल कर इस पानी से सिकाई करें। आराम मिलेगा।

—  लौकी के एक कप रस में आधा चम्मच सोंठ पाउडर मिलाकर लेने से जोड़ों के दर्द और सूजन कम होते है।

—  बथुए के पत्तों का रस आधा कप रोज सुबह खाली पेट कुछ दिन पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है।

—  उपवास करने से आम उत्पन्न होना बंद होता है और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। यह उपवास शारीरिक सामर्थ्य , ऋतु व स्थान के अनुसार किया जाना चाहिए।

—  सुबह शाम एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर पीने से आराम मिल सकता है।

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